भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी अब नहीं रहे. अटल जी भारतीय राजनीति के एक ऐसे ध्रुवतारा के रूप में याद किये जायेंगे जिनको देख कर, भारत के अनगिनत या यूँ कहें कि वर्त्तमान भारतीय राजनीति के सभी नेताओं ने अपनी राजनैतिक दिशा और दशा का निर्धारण कभी न कभी अवश्य किया है. भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वायपेयी एकमात्र ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने कभी भी अपने राजनैतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किसी भी तरह की मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया. राजनीति की दुर्गम राहों में अटल जी ने जिस संयम और शुचिता का अनुसरण किया वो आज ही नहीं बल्कि सदैव भारतीय राजनीति में अनुकरणीय रहेंगी.

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक रहे हैं. बाद में 1968 से 1973 तक वाजपेयी जी भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. पहली बार 1957 में इन्होंने गोंडा उत्तर प्रदेश से जनसंघ के प्रत्याशी के तौर पर विजयी होकर लोकसभा पहुँचे थे. 1977 से 1979 तक जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार में इन्हें विदेश मंत्री बनाया गया. फिर जनता पार्टी की कार्यशैली से असंतुष्ट होकर इन्होंने 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की. राजनीति में प्रवेश से पहले अटल जी ने एक पत्रकार के रूप में भी अनेक कीर्तिमान कायम किया. उन्होंने राष्ट्रधर्म, पान्चजन्य और वीर अर्जुन जैसी राष्ट्र भावना से ओत-प्रोत पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया. एक प्रखर और ओजस्वी कवि के रूप में तो उनकी ख्याति निराली रही है.

16 मई 1996 को उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी किन्तु, उनकी सरकार मात्र 13 दिनों तक ही चली, और 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था. इसके बाद संयुक्त मोर्चे की दो-दो सरकारों के गिर जाने के बाद पुनः 19 मार्च 1998 को वे दुबारा प्रधानमंत्री बने. किन्तु, 17 अप्रैल 1999 के उस ऐतिहासिक अपितु घृणित राजनीतिक घटनाक्रम के परिणामस्वरूप मात्र 13 महीने के बाद इनकी सरकार गिरा दी गयी, जब तमिलनाडु की सुश्री जयललिता की AIADMK ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और विश्वास प्रस्ताव मत के दौरान इनकी सरकार मात्र एक वोट से बहुमत साबित नहीं कर पायी. ये एक ऐसी घटना के तौर पर भारतीय राजनीति में याद की जाती है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने मात्र एक वोट से सरकार गिर जाने दी, किन्तु किसी अनैतिक विकल्प का सहारा नहीं लिया. और तब 1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव हुए और फिर 13 अक्टूबर 1999 को अटल जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लिया. यह सरकार कई मायनों में अभूतपूर्व रही. ये पहली गैर-काँग्रेसी सरकार थी जिसनें 5 सालों का कार्यकाल पूरा किया.

उनके आखिरी कार्यकाल में उनकी सरकार द्वारा किये गए कार्यों ने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों ही बदल के रख दी. अटल जी स्वयं को कभी राजनीति के लिए उपयुक्त नहीं मानते थे किन्तु उनका अभूतपूर्व राष्ट्रधर्म ही उन्हें राजनीति में खींच लाया. 25 दिसंबर 1924 को जन्में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आज 16 अगस्त 2018 को शाम 05 बजकर 05 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली. एक सम्पूर्ण निर्विवाद राजनैतिक जीवन जीने वाले अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन और जीवन दर्शन भारतीय राजनीति को जीवन भर प्रेरणा देता रहेगा. राजनीति में जिस संयम, शुचिता और मर्यादा का पालन अटल बिहारी वाजपेयी जी ने किया उसे देखते हुए यदि उन्हें भारतीय राजनीति का मर्यादापुरुषोत्तम कहा जाए तो ये कदापि अतिश्योक्ति नहीं होगी. भारतीय राजनीति के अटल सत्य रहे श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भावभीनी श्रद्धांजली.